मैं, तुम और शून्य

मेलबॉक्स के दाहिने कोने पर चमकता एक लाल रंग का बिंदु, बिल्कुल एक शून्य जैसा है। शून्य, जाना पहचाना सा हो गया है अब। ये लाल रंग का मुंह चिढाता शून्य केवल मेल बॉक्स के दाहिने कोने पर ही मौज़ूद नहीं है, अपितु ये मेरे-तुम्हारे बीच दिन-ब-दिन अपनी स्थिति को मजबूत करता जा रहा है और हर पल अपनी मौज़ूदगी और तुम्हारी ग़ैर मौज़ूदगी का अहसास दिलाता रहता है।


यूं तो इसके जरिए हमारे बीच संवादों का सिलसिला एक लंबे समय से ख़त्म हो चुका है, लेकिन उस लंबे समय के अंतराल के बावज़ूद ये यथास्थान अडिग है। इसके अस्तित्व के बारे में जब सोचता हूं तो इसके होने के कारणों को लेकर मन शंका से घिर जाता है। लेकिन फिर अपनी बेवकूफी पर हँसते हुए यह निष्कर्ष निकालता हूं कि “आज गुफ़्तगू का सिलसिला थम चुका है इसीलिए ये लाल बिंदु शून्य के रूप में अपनी उपस्थिति यहां दर्ज करा रहा है। अगर हमारे संवादों में पहले जैसी जीवंतता होती तो भी ये बिंदु यहां तो होता, लेकिन इसका रंग हरा होता, जोकि प्रेम और खुशहाली का प्रतीक होता और इसके शून्य का खालीपन हमारा प्यार से भर जाता.....”।

4 comments:

  1. बात तो सही है...लेकिन मुझे वो शून्य बायीं तरफ नज़र आता है...
    कई बार मैं भी दुविधा में रहता हूँ की अगर संवाद करना ही नही है तो लोग केवल अपनी उपस्थिति दर्ज करवाकर न जाने क्या दिखाना चाहते है.???
    हांलाकि पहले मैं भी इस शून्य के खेल में सम्लित था लेकिन अब मैं हरे झंडे के साथ होता हूँ या गायब ही रहता हूँ...

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  2. डबराल साहब, अब जीमेल की नई चैटिंग सैटिंग्स में बदलाव करके इस बिंदु को दायें तरफ भी देखा जा सकता है।

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  3. वाह अमृत जी - क्या बात कह दी - बहुत खूब

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  4. अदभुद कल्पनाशीलता............

    बहुत खूब...

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